SWARNIM GOUT CARE AYURVEDIC CAPSULE (60)
🟢 स्वर्णिम गाउट (गठिया वात) केयर आयुर्वेदिक कैप्सूल
🔹 गाउट क्या है? (What is Gout?)
गाउट एक प्रकार का गठिया (Arthritis) है जो शरीर में यूरिक एसिड की अधिकता के कारण होता है। यह मुख्यतः जोड़ों में सूजन, दर्द और जलन के रूप में प्रकट होता है।
🔹 प्रकार (Types of Gout):
Acute Gout – अचानक तेज़ दर्द व सूजन (प्रायः पैर के अंगूठे में)
Chronic Gout – लंबे समय तक रहने वाला, जो कई जोड़ों को प्रभावित करता है
Tophaceous Gout – गांठों का निर्माण (Tophi) – जटिल अवस्था
Pseudogout – यूरिक एसिड नहीं, बल्कि कैल्शियम क्रिस्टल के कारण
🔹 लक्षण (Symptoms):
अचानक तेज़ दर्द, विशेषकर रात में
जोड़ों में सूजन, लालिमा और गर्मी
चलने में कठिनाई
बार-बार एक ही जोड़ में दर्द
प्रभावित जगह पर गांठ बनना (Tophi)
बुखार या थकावट
🔹 मुख्य कारण (Causes):
खून में यूरिक एसिड का अधिक स्तर
अधिक प्रोटीन युक्त भोजन (मांस, मछली)
शराब (विशेषकर बियर)
मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली
किडनी की कार्यक्षमता में कमी
तनाव और अनियमित दिनचर्या
कुछ दवाएं (जैसे डाइयूरेटिक्स)
🔹 बचाव (Prevention):
पानी अधिक पिएं (3–4 लीटर/दिन)
यूरिक एसिड की नियमित जांच
वजन नियंत्रित रखें
नियमित योग व हल्का व्यायाम
दाल, मांस, बीयर जैसे हाई-पुरिन फूड से बचें
एल्कलाइन डाइट अपनाएँ
🔹 डाइट चार्ट (अनुकूल आहार):
सुबह:
गुनगुना पानी + नींबू रस
5 भिगोए हुए बादाम या अखरोट
नाश्ता:
सेब, पपीता, तरबूज
दलिया या ओट्स
ग्रीन टी या तुलसी चाय
दोपहर:
मल्टीग्रेन रोटी + तोरी/लौकी/पालक
अरहर या मूंग की पतली दाल
सलाद: खीरा, गाजर, चुकंदर
शाम:
नारियल पानी या छाछ
भुना मखाना या मूंग
रात्रि:
खिचड़ी या दलिया
हल्दी वाला गर्म दूध (लो-फैट)
🔹 अपथ्य (वर्जित आहार):
मांस, मछली, अंडा
लें (राजमा, चना दाल, मसूर – सीमित मात्रा)
बीयर, शराब
फ्राई, बासी, प्रोसेस्ड फूड
मैदा, नमकीन, चॉकलेट
पालक, फूलगोभी, मशरूम (उच्च पुरिन)
🔹 योगासन (Gout के लिए सहायक योग):
🔹स्वर्णिम गाउट केयर आयुर्वेदिक कैप्सूल
यूरिक एसिड का स्तर घटाने में सहायक
जोड़ों की सूजन व दर्द को शांत करता है
टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालता है
किडनी फंक्शन को सुधारता है
वात दोष को नियंत्रित करता है
🌿आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों के साथ संयोजन
कचनार गुग्गुल, कचनार छाल, अश्वगंधा, हल्दी, अपामार्ग पाउडर, तुलसी, सहजन छाल, निम्बोली, जिनसेंग, काली मिर्च, आंवला, कालमेघ, प्यौली, धमासा, गिलोय, शिलाजीत, लहसुन, सदाबहार, मुलैठी, मकोई छाल, मंजीष्ठा के साथ रिसर्च अनुसार निश्चित मात्रा में मिलाकर प्रोसेस किया जाता है, जिससे इसकी प्रभावशीलता अत्यधिक बढ़ जाती है।
प्रतिदिन 2 - 2 स्वर्णिम गाउट केयर आयुर्वेदिक कैप्सूल दिन में तीन बार सेवन करें